Archive for the 'My Experiences' Category
एक लम्बे अरसे बाद आज मैं आवाजें पर लौटा हूँ और इस बिलम्ब के लिए आवाजें के पाठकों से माफ़ी चाहूँगा| हबीब तनवीर जी पर लिखे और हिमाचल मित्र पत्रिका के शरद अंक में छपे अपने एक लेख को आपके समक्ष रख रहा हूँ शायद आपको अच्छा लगे… (लेख को ठीक से पढ़ने के लिए [...]
Filed under: Art & Culture, Cinema, My Experiences | 1 Comment
हिन्दी समय कार्यक्रम चल रहा था, और मशहूर रंगकर्मी और निर्देशक हबीब तनवीर जी के नाटक “चरणदास चोर” देखने के लिए भीड़ लगी हुई थी| मैं हमेशा की तरह कार्यक्रम का फिल्मांकन कर रहा था| ज्यों ही कार्क्रम ख़त्म हुआ सारी भीड़ बस हबीब जी के साथ फोटो खिंचवाने के लिए उनके आस-पास इकठ्ठा हो [...]
Filed under: Art & Culture, Cinema, My Experiences | Leave a Comment
भाषा, संस्कृति और अपनापन……
हमारे देश के विद्वान् लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहते हैं कि हम हिन्दुस्तानी होकर शायद अपनी भाषा हिन्दी को ही भूल गए हैं| हम में दूसरी भाषाओं को आपनाने की होड़ सी लग गयी है| जनवरी माह में, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में हिन्दी समय का आयोजन भी हुआ| उस समय [...]
Filed under: Art & Culture, My Experiences, Society | 2 Comments
एक नए युग का आरम्भ
सन 2000 को हमने बड़ी धूमधाम से मनाया था| एक ओर जहाँ नए साल का आरम्भ होने जा रहा था वहीँ हम एक नई सदी और एक नए युग की तरफ भी बढ़ रहे थे| 20वीं सदी को अलविदा कहा और धन्यावाद दिया क्योंकि इस सदी नें हमें बहुत कुछ दिया था| इसे सही मायने [...]
Filed under: My Experiences, Politics, Society | 4 Comments
बस 6 किलोमीटर दूर था मेरा स्कूल मेरे घर से, पर फिर भी घर वालों को चिंता होती थी कि बच्चे स्कूल कैसे पहुंचेंगे? 6 साल का हो चुका था तब तक और पहली कक्षा में भी पढता था| पिछले साल भी मेरी माँ दाखिले के लिए बात करने गयी थी मगर अध्यापकों नें मना [...]
Filed under: Education, My Experiences, Politics | 7 Comments
फिर भी उसे सब वैश्या कहते थे…
गुलाम हो गया था वो लहू जो नसों मे दौड़ रहा था उसकी,होश कहाँ था उसे अब आज़ादी का||
मसलते रहे, नोचते रहे, जिसका भी मन किया वो काटता चला गया,जिस्म निशाँ बन गया शबाबी का||
पड़ी रही सिसकती हुई, अँधेरे ख्वाबों कि रोशनी में,तिल-तिल मरी सबकी हबस का शिकार होकर||
बस वही रोई जो रोज़ रोती हैं,पहले [...]
Filed under: My Experiences, Poetry, Society | 5 Comments
कज़री का मुजरा अभी बाकि था…
सच कहूँ तो प्यार हो गया था मुझे उन दिनों| एक अजीब सी बेचैनी रहती थी| मुशिकिल था मेरे लिए भुलाना उन आँखों को जिनकी खामोशी अचानक मनमोहक हो गयी थी| बस बिडम्बना यह है की उन्हें फिर कभी नहीं देख पाया मैं| (जो मित्र मेरा लेख पहली बार पढ़ रहे हों, वो मेरा पिछला [...]
Filed under: My Experiences, Society | 6 Comments
Tags: Mujra, Prostitution
सुबह के 8 बज चुके थे और अभी तक एक शांति भरा माहौल बना हुआ था| अरुणा अपने 7 साल के बेटे को नहा धुला कर खाना खिला रही थी| अब तो उसने स्कूल जाना भी बंद कर दिया था| पूनम अपने बाल सुखा रही थी चबूतरे में कड़ी होकर| शीला अभी तक सुबह से [...]
Filed under: My Experiences, Society | 13 Comments
Tags: Mujra, Prostitution







